भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव के संकेत दिखाई देने लगे हैं। ऑटो सेक्टर, जहां पिछले कुछ महीनों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की लगातार बिकवाली देखने को मिल रही थी, अब एक बार फिर उनकी दिलचस्पी बढ़ती नजर आ रही है। अगस्त की पहली छमाही में ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार का ध्यान खींचा है।
इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने ऑटो सेक्टर से करीब 4,574 करोड़ रुपये की निकासी की थी। हालांकि, अगर पिछले पांच महीनों का आंकड़ा देखा जाए तो इस सेक्टर से अब भी करीब 35,739 करोड़ रुपये की बड़ी रकम बाहर जा चुकी है। ऐसे में अगस्त में हुई खरीदारी को सेक्टर के लिए एक सकारात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
ऑटो इंडेक्स में आया बड़ा बदलाव
ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने की एक बड़ी वजह शेयर बाजार में इस सेक्टर का प्रदर्शन भी माना जा रहा है। निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब तीन महीने तक एक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद अब ऊपर की तरफ ब्रेकआउट दे चुका है।
आसान भाषा में समझें तो ऑटो इंडेक्स काफी समय से एक निश्चित स्तर के बीच ऊपर-नीचे हो रहा था। अब इस दायरे से बाहर निकलकर इंडेक्स में तेजी देखने को मिल रही है। इससे निवेशकों के बीच ऑटो कंपनियों को लेकर सकारात्मक माहौल बना है।
इन ऑटो शेयरों पर नजर
ऑटो सेक्टर के कई प्रमुख शेयरों में भी तेजी के संकेत देखने को मिल रहे हैं। बजाज ऑटो, बॉश, हीरो मोटोकॉर्प, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मदरसन, सोनाकॉम, टीवीएस मोटर और यूनो मिंडा जैसे शेयर निवेशकों के रडार पर हैं।
इन कंपनियों में कारोबार और मांग से जुड़े सकारात्मक संकेतों के अलावा शेयरों की तकनीकी स्थिति भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा रही है। हालांकि किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और बाजार जोखिम को समझना जरूरी है।
सितंबर ऑटो सेक्टर के लिए रहा है अच्छा
इतिहास पर नजर डालें तो सितंबर का महीना भी ऑटो सेक्टर के लिए काफी अच्छा रहा है। पिछले 20 वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक निफ्टी ऑटो इंडेक्स 16 बार सितंबर महीने में बढ़त के साथ बंद हुआ है। इस दौरान इंडेक्स की औसत बढ़त करीब 3.36 फीसदी रही है।
हालांकि पुराने प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में भी उसी तरह की तेजी की गारंटी नहीं होती। बाजार की दिशा आर्थिक स्थिति, ब्याज दरों, बिक्री के आंकड़ों और निवेशकों की धारणा समेत कई कारकों पर निर्भर करती है।
Financial Services में सबसे ज्यादा निवेश
अगस्त की पहली छमाही में विदेशी निवेशकों ने सबसे ज्यादा पैसा फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में लगाया। इस सेक्टर में करीब 6,950 करोड़ रुपये का FPI निवेश आया।
इससे पहले मार्च से मई के बीच फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर से करीब 12,303 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। इसके बाद जून में स्थिति बदली और इस सेक्टर में करीब 7,260 करोड़ रुपये का निवेश आया। लगातार निवेश बढ़ने से संकेत मिल रहा है कि विदेशी निवेशक धीरे-धीरे फाइनेंशियल कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तरफ बढ़ रहे हैं।
Consumer Stocks भी बने पसंदीदा
विदेशी निवेशकों की नजर सिर्फ ऑटो और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर पर नहीं है। कंज्यूमर स्टॉक्स में भी उनकी दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दे रही है। घरेलू खपत में मजबूती और त्योहारी सीजन से जुड़ी मांग की उम्मीद के कारण इस सेक्टर को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेशकों की वापसी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि पिछले कुछ महीनों की भारी निकासी को देखते हुए इसे पूरी तरह ट्रेंड बदलने की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी। आने वाले महीनों में FPI का लगातार निवेश और कंपनियों के प्रदर्शन से ही साफ होगा कि ऑटो सेक्टर में यह तेजी कितनी टिकाऊ साबित होती है।