अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के छह महीने बीत जाने के बाद भी मध्य पूर्व में जारी यह संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा है। शुरुआत में जिस सैन्य कार्रवाई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने महज कुछ सप्ताह में समाप्त होने वाली "छोटी मुहिम" बताया था, वह अब अमेरिका के लिए एक जटिल रणनीतिक व राजनीतिक चुनौती बन चुकी है। ईरान के पूरी तरह आत्मसमर्पण न करने और वैश्विक ऊर्जा मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में नौवहन बाधित रहने के कारण ट्रम्प प्रशासन अब अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए सीधे सैन्य हमलों के बजाय नए आर्थिक प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकाबंदी के जरिए तेहरान पर दबाव बनाने का रुख अपना रहा है।
इस छह महीने लंबे टकराव ने अमेरिका के घरेलू राजनीतिक परिदृश्य से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक गहरा प्रभाव डाला है:
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राजनीतिक संकट और ट्रम्प की घटती रेटिंग: अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों और अनिश्चित युद्ध के कारण सार्वजनिक असंतोष बढ़ा है। रॉयटर्स/इप्सोस के सर्वेक्षणों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत के बाद से राष्ट्रपति ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 33% रह गई है। आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले इस मुद्दे ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेद उत्पन्न कर दिए हैं।
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जी-7 देशों में बढ़ती महंगाई: होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका (3.4%), ब्रिटेन (2.9%), कनाडा (3.03%) और जर्मनी (2.8%) सहित लगभग सभी G7 अर्थव्यवस्थाओं में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में वृद्धि दर्ज की गई है।
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सैन्य नुकसान और रक्षा संसाधनों पर दबाव: अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस और विश्लेषकों की रिपोर्ट के अनुसार, कई महीनों की लगातार तैनाती ने अमेरिकी नौसेना के संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाला है। इसके साथ ही, पेंटागन ने अपने महत्वपूर्ण पैट्रियट और THAAD इंटरसेप्टर मिसाइलों के वैश्विक भंडार का एक बड़ा हिस्सा इस संघर्ष में इस्तेमाल कर लिया है।
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ईरान का परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय स्थिति: अमेरिकी और इजराइली हमलों में ईरान के प्रमुख संवर्धन केंद्रों को क्षति पहुंची है और यूरेनियम संवर्धन का ब्रेकआउट समय बढ़कर लगभग 1 वर्ष हो गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों की गैर-मौजूदगी और संवर्धित यूरेनियम के ठिकाने को लेकर अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सहयोगियों को संकेत दिया है कि वाशिंगटन फिलहाल नए बड़े सैन्य हमलों की ओर कदम बढ़ाने के बजाय आर्थिक घेराबंदी को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी तनाव के बीच यह संघर्ष कब समाप्त होगा, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हुई हैं।