लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से किए गए एक विवादास्पद पोस्ट को लेकर राज्यकी राजनीति में भारी भूचाल आ गया है। बलिया जिले में विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में कथित तौर पर एक अजीबोगरीब और आपत्तिजनक नाम दर्ज होने के मामले पर सफाई देने के चक्कर में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया था।इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह और पार्टी नेता राजेश यादव नेचुनाव आयोग की निष्पक्षता, सॉफ्टवेयर और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
चौतरफा आलोचना और बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए उत्तर प्रदेश के CEO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक नया पोस्ट साझा कर अपनी गलती स्वीकार की और सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगते हुए भविष्य में शालीन भाषा के प्रयोग का भरोसा दिलाया है।
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बलिया की वोटर लिस्ट में 'राम ने यादव को मारा' जैसे आपत्तिजनक रूप से दर्ज नाम का मामला सार्वजनिकहुआ,जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे। इस पर आप सांसद संजय सिंह और अन्य नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से सवाल किया कि आखिर किस तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है जो इस प्रकार के नामों कोअनुमति देता है।
इसके जवाब में CEO कार्यालय के आधिकारिक हैंडल से एक पोस्ट किया गया जिसमें लिखा गया कि "कंप्यूटर जातिवादी नहीं है,"और इसकी भाषा को लेकर जनता तथा राजनीतिक दलों में तीव्र नाराजगी फैल गई। स्थिति की नज़ाकत को भांपते हुए CEO ने अपने दूसरे संदेश मेंस्वीकार किया कि उनकी पिछली टिप्पणी का लहजा और भाव एक सरकारी संस्थान की गरिमा के अनुकूल नहीं था, जिसके लिए उन्होंने हृदय से खेद व्यक्त किया है।