हिंदी सिनेमा में प्यार को पर्दे पर एक खास खूबसूरती देने वाले फिल्ममेकर यश चोपड़ा को उनकी 94वीं बर्थ एनिवर्सरी पर यश राज फिल्म्स ने यादकिया। रविवार को YRF के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल से एक छोटा-सा वीडियो शेयर किया गया, जिसने चोपड़ा साहब की यादों को फिरताजा कर दिया। महज कुछ सेकंड के इस वीडियो में कैमरे के पीछे बैठे यश चोपड़ा की तस्वीर दिखाई गई और लिखा था, “हमारे फाउंडर को यादकरते हुए।” वीडियो छोटा जरूर था, लेकिन जिस शख्स को याद किया गया, उसकी सिनेमाई विरासत इतनी बड़ी है कि कुछ सेकंड भी काफी लगे।
27 सितंबर 1932 को लाहौर में जन्मे यश चोपड़ा ने हिंदी सिनेमा को सिर्फ फिल्में नहीं दीं, बल्कि कहानियों को देखने का एक अलग नजरिया भीदिया। ‘दीवार’ और ‘कभी-कभी’ जैसी फिल्मों में उन्होंने रिश्तों, महत्वाकांक्षा, संघर्ष और प्यार को बेहद खूबसूरती से पर्दे पर उतारा। उनकी फिल्मों मेंभावनाएं कभी बोझिल नहीं लगती थीं, बल्कि कहानी के साथ इस तरह घुल जाती थीं कि दर्शक किरदारों के दर्द और खुशी दोनों को महसूस करनेलगते थे। यही उनकी कहानी कहने की खासियत थी, जिसने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के सबसे यादगार निर्देशकों में जगह दिलाई।
हालांकि यश चोपड़ा का नाम आते ही सबसे पहले बॉलीवुड का रोमांस याद आता है। बर्फ से ढके पहाड़, खूबसूरत लोकेशन, उड़ती शिफॉन साड़ियां, दिल में उतर जाने वाले गाने और प्यार में डूबे किरदार—इन सबको उन्होंने मिलाकर ऐसा सिनेमाई अंदाज बनाया, जिसे बाद में बॉलीवुड रोमांस कीपहचान ही मान लिया गया। स्विट्जरलैंड की खूबसूरत वादियों से लेकर यादगार प्रेम कहानियों तक, उनकी फिल्मों ने दर्शकों को सिर्फ प्यार कीकहानी नहीं दिखाई, बल्कि प्यार को महसूस करने का एक पूरा सिनेमाई अनुभव दिया।
यश चोपड़ा की कहानी सिर्फ निर्देशक की कुर्सी तक सीमित नहीं रही। उन्होंने यश राज फिल्म्स की नींव रखकर एक ऐसा संस्थान खड़ा किया, जिसनेहिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई कलाकारों और तकनीशियनों को मंच दिया। वक्त के साथ YRF एक बड़े प्रोडक्शन हाउस के रूप में विकसित हुआ औरचोपड़ा की सोच की छाप उसकी यात्रा में लगातार नजर आती रही। उनके बनाए इस फिल्मी साम्राज्य ने कई पीढ़ियों की कहानियों को दर्शकों तकपहुंचाया और हिंदी सिनेमा के बदलते दौर के साथ खुद को भी आगे बढ़ाया।
आज यश चोपड़ा हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्मों का जादू अब भी खत्म नहीं हुआ है। उनके गाने बजते ही पुरानी यादें लौट आती हैं, उनकेकिरदार आज भी चर्चा में रहते हैं और उनकी फिल्मों के रोमांटिक दृश्य नई पीढ़ी तक पहुंचते रहते हैं। YRF की यह छोटी-सी श्रद्धांजलि इसी लंबीविरासत की याद दिलाती है। शायद यश चोपड़ा को याद करने का सबसे खूबसूरत तरीका भी यही है—उनकी फिल्मों को फिर से देखना, उनके गानेसुनना और उन कहानियों में खो जाना, जिन्होंने बॉलीवुड को प्यार करने का एक नया अंदाज सिखाया।
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