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दिनभर की भागदौड़ के बाद अंधेरे में सुकून तलाशना: क्या है 'निक्टोफिलिया' (Nyctophilia)? जानिए मनोवैज्ञानिकों की राय

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Posted On:Wednesday, October 14, 2026

कामकाज और भागदौड़ भरे लंबे दिन के बाद क्या आपका मन भी किसी अंधेरे या बेहद धीमी रोशनी वाले कमरे में शांत बैठने का करता है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह स्थिति केवल अंधेरे की चाहत नहीं, बल्कि दिनभर के मानसिक तनाव और निरंतर स्क्रीन व शोर से राहत पाने की दिमागी कोशिश हो सकती है। मनोविज्ञान की भाषा में रात या अंधेरे के प्रति इस विशेष लगाव को 'निक्टोफिलिया' (Nyctophilia) कहा जाता है।
निक्टोफिलिया क्या है? क्या यह कोई मानसिक विकार है?
गुरुग्राम स्थित मारेंगो एशिया हॉस्पिटल्स में क्लीनिकल साइकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मुनिया भट्टाचार्य के अनुसार:
"निक्टोफिलिया रात या अंधेरे के प्रति एक स्वाभाविक आकर्षण या पसंद को दर्शाता है। यह केवल एक व्याख्यात्मक शब्द (Descriptive term) है, कोई औपचारिक मनोरोग या मनोवैज्ञानिक विकार (Psychiatric diagnosis) नहीं। केवल शांत और कम रोशनी वाली जगह पसंद होने का मतलब यह कतई नहीं है कि व्यक्ति किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित है।"
अंधेरे कमरे में क्यों मिलता है सुकून?
विशेषज्ञों का कहना है कि अंधेरे में बैठने की इच्छा असल में लगातार मिलने वाले बाहरी उद्दीपनों (Sensory Overload) से दिमाग को 'स्विच ऑफ' करने का एक तरीका है।

  • सेंसरी डिकंप्रेशन (Sensory Decompression): पीएसआरआई (PSRI) अस्पताल की मनोवैज्ञानिक और काउंसलर अर्पिता कोहली बताती हैं कि दिनभर तेज रोशनी, मोबाइल-लैपटॉप की स्क्रीन, शोरगुल और बातचीत के कारण दिमाग लगातार सतर्क (Alert) रहता है। जब आप अंधेरे में कुछ पल बिताते हैं, तो दिमाग को विजुअल संकेतों को प्रोसेस करने से राहत मिलती है, जिससे मानसिक थकावट कम होती है।
  • अपेक्षाओं और नोटिफिकेशन से दूरी: रात का समय अक्सर अकेला और शांत होता है। इस दौरान कोई ईमेल, फोन कॉल, नोटिफिकेशन या सामाजिक अपेक्षाएं नहीं होतीं, जिससे व्यक्ति खुद को सुरक्षित और दबाव-मुक्त महसूस करता है।
शांत सुकून या सामाजिक अलगाव? अंतर समझना है जरूरी
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि शांत माहौल में सुकून पाना सामान्य है, लेकिन अगर यह आदत रोजमर्रा की जिंदगी से भागने का जरिया बन जाए, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।
डॉ. भट्टाचार्य इसके लिए खुद से एक सीधा सवाल पूछने (Self-check) की सलाह देती हैं:
"क्या मैं अंधेरे का चुनाव इसलिए कर रहा/रही हूँ क्योंकि यह मुझे शांत और तरोताजा करता है, जबकि मेरी दिनचर्या सामान्य चल रही है? या फिर मैं अंधेरे में इसलिए छिप रहा/रही हूँ क्योंकि मुझे बाहरी दुनिया और लोगों का सामना करना बहुत मुश्किल लग रहा है?"
कब सतर्क होना जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, पेशेवर मदद (Mental Health Professional) लेने पर विचार करना चाहिए यदि:
  • व्यक्ति लगातार लोगों और बातचीत से दूरी बनाने लगे।
  • अपनी पसंदीदा गतिविधियों में रुचि खत्म हो जाए।
  • लगातार उदासी, तनाव, चिड़चिड़ापन या घबराहट बनी रहे।
  • केवल पूरी तरह अलग-थलग रहने पर ही सुरक्षित या सामान्य महसूस हो।
निष्कर्ष:
एक थकाऊ दिन के बाद कुछ देर मंद रोशनी या अंधेरे में बैठकर खुद को 'रिचार्ज' करना पूरी तरह सामान्य और सेहतमंद आदत है। असली बात यह पहचानना है कि यह आदत आपको ऊर्जा दे रही है या रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से दूर कर रही है।


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