भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अत्यधिक नकदी (Surplus Liquidity) को नियंत्रित करने के लिए खुले बाजार की कार्रवाइयों (Open Market Operations - OMO) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है। लगभग नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस पहली नीलामी में केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2029 से 2032 के बीच परिपक्व (Mature) होने वाले 5,000 करोड़ रुपये मूल्य के सरकारी बॉन्ड सफलतापूर्वक बेचे। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों के पास जमा अतिरिक्त नकदी को अवशोषित करना है, जो हाल ही में 11.6 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई थी।
रिजर्व बैंक आगामी हफ्तों में चरणबद्ध तरीके से 2,500-2,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बॉन्ड बेचने की योजना बना रहा है, जिससे प्रणाली से लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक की लिक्विडिटी बाहर निकाली जा सकेगी। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जब बैंकों के पास अत्यधिक नकदी उपलब्ध होती है, तो केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों में बदलाव का असर वाणिज्यिक बैंकों की ऋण दरों (Loan Rates) तक पहुँचने में समय लगता है।
अक्टूबर में आयोजित होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक से पूर्व लिक्विडिटी को नियंत्रित करने की इस पहल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि आगामी नीति में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25%) की वृद्धि की जाती है, तो इस ओएमओ बिक्री के प्रभावस्वरूप बैंक तुरंत अपनी कर्ज दरों को संशोधित कर सकेंगे, जिससे मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के प्रयास अधिक प्रभावी होंगे।