मध्य पूर्व में महीनों से जारी सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा और निर्णायक बयान सामने आया है। Axios को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस संघर्ष के एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़े मोड़ पर खड़ा है, जहां उन्हें यह गंभीर फैसला लेना है कि क्या ईरान पर फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू किए जाएं या कूटनीतिक दबाव का रास्ता चुना जाए।
ट्रंप का यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) से इतर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के शीर्ष नेताओं के साथ होने वाली उनकी उच्चस्तरीय बैठकों से ठीक पहले आया है। गौरतलब है कि अगस्त में सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर संभावित ईरानी जवाबी हमलों की चिंताओं के चलते बड़े अमेरिकी सैन्य ऑपरेशनों को स्थगित कर दिया गया था। तब से अमेरिकी रणनीति का मुख्य केंद्र नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade), आर्थिक प्रतिबंधों को कड़ा करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रखने पर रहा है।
इसी बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) को 262-159 के अंतर से पारित कर दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप जल्द ही इस कानून पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तहत रूस और ईरान पर अभूतपूर्व आर्थिक और वाणिज्यिक प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।