‘मिर्ज़ापुर’ अब सिर्फ एक OTT सीरीज नहीं रह गई है, बल्कि पॉप कल्चर का ऐसा हिस्सा बन चुकी है, जिसके किरदार और डायलॉग दर्शकों की जुबान पर रहते हैं। अब यही दुनिया बड़े पर्दे पर ‘मिर्ज़ापुर: द मूवी’ के जरिए नजर आने वाली है। फिल्म के निर्देशक गुरमीत सिंह का मानना है कि इसफ्रेंचाइजी की सफलता में मेहनत के साथ किस्मत ने भी अहम भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक, जब पहला सीजन बनाया गया था, तब OTT अपनेशुरुआती दौर में था और मेकर्स पर स्टार पावर या नंबरों का वैसा दबाव नहीं था। इसलिए कहानी और कलाकारों पर पूरा ध्यान देने का मौका मिला।
पहले सीजन की कास्टिंग को याद करते हुए गुरमीत ने बताया कि उस वक्त सबसे बड़ी प्राथमिकता अच्छी कहानी, मजबूत लेखन और बेहतरीन कलाकार थे। उन्हें लगता है कि ‘मिर्ज़ापुर’ के लिए सही कलाकारों का मिलना इस सफर का बेहद खास हिस्सा रहा। उस समय शो की कास्ट मेंशामिल कई कलाकार बड़े नाम नहीं थे, लेकिन उनमें प्रतिभा की कोई कमी नहीं थी। गुरमीत के मुताबिक, ये सभी कलाकार बस उस मौके का इंतजार कर रहे थे, जो उन्हें दर्शकों के सामने अपनी पहचान बनाने का मौका दे। ‘मिर्ज़ापुर’ ने उन्हें वह मंच दिया और देखते ही देखते ये चेहरे घर-घर पहचाने जाने लगे।
सीरीज की जबरदस्त लोकप्रियता के बाद इसे थिएटर तक ले जाने का फैसला स्वाभाविक कदम जैसा रहा। गुरमीत बताते हैं कि फिल्म को सिर्फ इसलिए नहीं बनाया गया कि शो सफल हो चुका था, बल्कि इसे एक नए प्रोजेक्ट की तरह लिया गया। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि फिल्म पुरानेफैंस की उम्मीदों पर खरी उतरे और उन दर्शकों को भी कहानी से जोड़ सके, जिन्होंने सीरीज नहीं देखी है। इसलिए टीम ने कोशिश की कि फिल्म को समझने के लिए दर्शकों को पहले की कहानी का पूरा ज्ञान होना जरूरी न पड़े। यानी ‘मिर्ज़ापुर’ की दुनिया वही रहे, लेकिन बड़े पर्दे पर उसका अनुभवन महसूस हो।
गुरमीत के अनुसार, पुराने किरदारों के साथ फिल्म में कई नए पहलू जोड़ने की गुंजाइश मिली। थिएटर के लिए कहानी को ज्यादा इंटेंसिटी, स्वैग औरमनोरंजन के साथ पेश करने पर जोर दिया गया। उनके लिए जरूरी था कि दर्शकों को वही दुनिया मिले जिससे वे पहले से जुड़े हुए हैं, लेकिन इस बारउसका दायरा बड़ा महसूस हो। खासकर बड़े पर्दे पर तीन घंटे की फिल्म को अपने दम पर एक मुकम्मल सिनेमाई अनुभव बनाना जरूरी था, ताकिदर्शक इसे सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड न समझें।
यही संतुलन ‘मिर्ज़ापुर: द मूवी’ के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है और इसकी खासियत भी। एक तरफ पुराने फैंस अपने पसंदीदा किरदारों औरदुनिया में कुछ नया देखना चाहेंगे, तो दूसरी तरफ नए दर्शकों के लिए कहानी को सहज और मनोरंजक बनाए रखना होगा। गुरमीत सिंह की बातों सेसाफ है कि फिल्म को इसी सोच के साथ तैयार किया गया है—पुराने दर्शकों को उनकी पसंदीदा दुनिया का बड़ा और ज्यादा मजेदार अनुभव मिले औरनए दर्शकों के लिए भी यह कहानी पहली मुलाकात में ही दिलचस्प बन जाए। अब देखना होगा कि ‘मिर्ज़ापुर’ का वही भौकाल बड़े पर्दे पर किसअंदाज में रंग जमाता है।